गुरुवार, जुलाई 08, 2010

गीत मेरी आँख त्तुम्हारे सपने


गीत
मेरी आँख तुम्हारे सपने
वीरेन्द्र जैन

मेरी आँख तुम्हारे सपने
अबतक वही कुंवारे सपने

ये अर्न्तमन की आदत हैं
ये मुझ निर्धन की दौलत हैं
स्मृतियों के कैनवास पर
मैंने रोज उभारे सपने
मेरी आंख, तुम्हारे सपने
अबतक वही कुंवारे सपने

ऐसे गये लगाये शीशे
फूल बने टूटी चूड़ी से
रोज कल्पना के आंचल में
जड़ते कई सितारे सपने
मेरी आंख, तुम्हारे सपने
अबतक वही कुंवारे सपने

पहले भीना, फिर भारीपन
जाने कितने रंग रंगा मन
बिखर गये हर बार,मगर
मैंने हर बार संवारे सपने
मेरी आंख, तुम्हारे सपने
अबतक वही कुंवारे सपने

वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड अप्सरा टाकीज के पास भोपाल [म.प्र.] 462023
मो. 9425674629

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