
एक गज़लनुमा रचना
अगर बरसात में छत का टपकना बन्द हो जाये
अगर बरसात में छत का टपकना बन्द हो जाये
तो हर इक बूंद में आनन्द ही आनन्द हो जाये
तुम्हारे बाम पर आने का लम्हा गर मुकर्रर हो
हमीं क्या हर कोई फिर वक़्त का पाबन्द हो जाये
अगर अंतर करें ना एकलव्यों और अर्जुन में
हमारे देश का हर इक गुरू गोबिन्द हो जाये
कभी दोहा कभी मुक्तक कभी हों शेर गज़लों के
तुम्हारे पैरहन जैसा हमारा छंद हो जाये
सुबह की लालिमा को चाँदनी में घोल दे कोई
तो उसका रंग तेरे रंग के मानिन्द हो जाये
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल [म.प्र.] 462023
मो. 9425674629
तुम्हारे बाम पर आने का लम्हा गर मुकर्रर हो
जवाब देंहटाएंहमीं क्या हर कोई फिर वक़्त का पाबन्द हो जाये
वाह...वा...एक दम अछूता शेर कहा है आपने...बेहतरीन...दाद कबूल करें...
नीरज
अगर अंतर करें ना एकलव्यों और अर्जुन में
जवाब देंहटाएंहमारे देश का हर इक गुरू गोबिन्द हो जाये
तुम्हारे बाम पर आने का लम्हा गर मुकर्रर हो
हमीं क्या हर कोई फिर वक़्त का पाबन्द हो जाये
वाह बहुत लाजवाब शेर हैं। आभार।