
एक गजलनुमा रचना सिर्फ यादों की बर्फ पिघली है
वीरेन्द्र जैन
आम अमरूद है ना इमली है
बाग में फूल है न तितली है
अब वहां आप हैं ना हलचल है
सिर्फ यादों की बर्फ पिघली है
घूम फिर जिक्र आ ही जाता है
जब भी बातों में बात निकली है
हर किसी ने सम्हाल कर रक्खी
हर किसी की जुबान फिसली है
पीर से कोई बच नहीं पाया
उसने उगली है हमने निगली है
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड अप्सरा टाकीज के पास भोपाल [म.प्र.] 462023
मो. 9425674629
हर किसी ने सम्हाल कर रक्खी
जवाब देंहटाएंहर किसी की जुबान फिसली है
वाह, क्या बात है ! बहुत सुन्दर !
पीर से कोई बच नहीं पाया
जवाब देंहटाएंउसने उगली है हमने निगली है
गजब कि पंक्तियाँ हैं ...
बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...
bahut hi pyari rachna..
जवाब देंहटाएंA Silent Silence : Kuch Maang Ke To Dekh..(कुछ माँग के तो देख..)
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