मंगलवार, जुलाई 27, 2010

एक गज़लनुमा रचना - सिर्फ यादों की बर्फ पिघली है


एक गजलनुमा रचना सिर्फ यादों की बर्फ पिघली है
वीरेन्द्र जैन


आम अमरूद है ना इमली है
बाग में फूल है न तितली है

अब वहां आप हैं ना हलचल है
सिर्फ यादों की बर्फ पिघली है

घूम फिर जिक्र आ ही जाता है
जब भी बातों में बात निकली है

हर किसी ने सम्हाल कर रक्खी
हर किसी की जुबान फिसली है

पीर से कोई बच नहीं पाया
उसने उगली है हमने निगली है

वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड अप्सरा टाकीज के पास भोपाल [म.प्र.] 462023
मो. 9425674629

3 टिप्‍पणियां:

  1. हर किसी ने सम्हाल कर रक्खी
    हर किसी की जुबान फिसली है

    वाह, क्या बात है ! बहुत सुन्दर !

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  2. पीर से कोई बच नहीं पाया
    उसने उगली है हमने निगली है


    गजब कि पंक्तियाँ हैं ...
    बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

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